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Calcium

Calcium Article - 1Veda Ayurveda

सोशल मीडिया के दौर में चीज़ें जितनी आसान हुई हैं उतना ही इसका दुरूपयोग भी बढ़ गया है और सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि हमारे देश के अधिकांश लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं होते, अपने शरीर के साथ एक्सपेरिमेंट करना तो जैसे फैशन बनता जा रहा है, उदाहरण के रूप में लोग ऐलोवेरा का प्रयोग विज्ञापन देख के करते हैं लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि गर्भवती स्त्री यदि इसका सेवन करे उसका गर्भपात हो सकता है, ऐसी ही कैल्शियम से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें “चूना अमृत है” या “70 से अधिक रोगों को ठीक कर देता है चूना” या इसी तरह कि आयुर्वेद के नुस्खों की पोस्ट बहुत से लोग बिना जाने समझें फैलते रहते हैं।

इस तरह की पोस्ट में अधिकांश बार आयुर्वेद की दवाओं या जड़ीबूटियों को इस तरह से महिमामंडित किया जाता है जैसे बस उसे खाया और चमत्कार हो गया! 

चूने को कैल्शियम का सबसे बड़ा स्रोत बताया जाता है कुछ हद तक यह ठीक है लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से कितना फायदेमंद या नुकसानदेह है उसे समझते हैं:

चूने को कैल्शियम कार्बोनेट के नाम से भी जाना जाता है, शरीर के लिए कैल्शियम बेहद आवश्यक है लेकिन इसका उपयोग करने का तरीका यह नहीं है कि सीधे कैल्शियम कार्बोनेट या चूने को उठा के खा लिया जाये और हो गयी कैल्शियम की कमी पूरी! ऐसा करना न सिर्फ स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है अपितु कई बार यह जानलेवा रोगों को भी पैदा कर सकता है।

कैल्शियम शरीर की हड्डियों, दातों के लिए तो बेहद फायदेमंद हैं ही इसके साथ-साथ दिल, नसों और रक्त के थक्के प्रणालियों को भी काम करने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम कार्बोनेट को एसिडिटी की समस्या में एंटासिड के रूप में भी लिया जाता है। गुर्दे की बीमारी वाले लोगों में फॉस्फेट के स्तर को कम करने के लिए कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम एसीटेट भी लिया जाता है। लेकिन प्रत्येक स्थिति में लिया जाने वाला यह कैल्शियम पूरी तरह से शुद्ध व विषाक्तता से रहित होना चाहिए और इसको नियमित रूप से ली जाने वाली मात्रा भी बेहद संतुलित होनी चाहिए,1000-1200 मि.ग्रा. से अधिक कैल्शियम की मात्रा शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है! प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले कैल्शियम व अन्य पूरक स्रोतों से मिलने वाले कैल्शियम की प्रतिदिन की मात्रा 1000-1200 मि.ग्रा. से अधिक किसी भी स्थिति में नियमित रूप से न लें, अधिक मात्रा में कैल्शियम का नियमित प्रयोग किड़नी में पथरी, किड़नी फेलियर व कई बार मृत्यु का कारण भी बन सकती है।

कई लोग पान के पत्ते के साथ चूने को खाते हैं, इस तरह से चूने का सेवन करने वाले अधिकांश लोगों को पेट से जुड़ी कई गंभीर परेशानियां व किड़नी से जुड़ी कई शारीरिक परेशानियां पायीं जाती हैं!  कैल्शियम का आहार के रूप में प्रयोग आर्टिफीसियल स्रोतों की अपेक्षा कई गुना बेहतर होता है।

तिल, अजवायन, दही, बीन्स, दाल, बादाम, व्हेय प्रोटीन, केला, पत्तेदार साग, अंजीर, दूध आदि प्राकृतिक रूप से कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत होते हैं, इनका प्रयोग कैल्शियम की कमी को पूरा करने में किया जाना अधिक हितकर होता है।

कृपया कोशिश करें कि किसी भी सुनी-सुनाई या सोशल मीडिया पर फ़ैल रही खबर को देखकर उसे अपने शरीर पर प्रयोग करना आरम्भ न कर दें, अपने शरीर को प्रयोगशाला मत बनाइये क्योंकि जीवन सिर्फ एक बार मिलता है ऐसी किसी औषधि या नुस्खे को जिसे आप आपके लिए बेहद फायदेमंद समझकर बिना सोचे-समझे इस्तेमाल न करने लग जायें! संभव है कि जिसे आप चमत्कारी चीज़ समझ रहे हों वह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो, आपको कभी भी यदि कोई शारीरिक या स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो चाहे वह छोटी हो या बड़ी उसके लिए अपने डॉक्टर से मिलकर ही उपचार करवायें।