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    Asthma - 1Veda Ayurveda

    आयुर्वेद से दूर हो सकता है अस्थमा 

    आयुर्वेद की मदद से अस्थमा पर नियंत्रण संभव 

    आयुर्वेद को अपनाएँ अस्थमा को दूर भगाएं  

    विश्व अस्थमा दिवस :  अस्थमा सांस से संबंधित बीमारी है जिसमें पीड़ित व्यक्ति की सांस फूलने लगती है। इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ के अलावा छाती में जकड़न, बहुत अधिक पसीना, उल्टी आदि कई तरह की शारीरिक समस्याएं होनी शुरू हो जाती है। इसमें सुबह और शाम सांस लेने में तकलीफ ज्यादा होती है। अस्थमा का अटैक आने पर यदि मरीज को तुरंत चिकित्सा उपलब्ध नहीं कराई जाए तो जान भी जा सकती है। 

    अमूमन अस्थमा के अटैक से बचने के लिए मरीज अपने पास इन्हेलर रखते हैं। इन्हेलर सीधे रोगी के फेफड़ों में पहुंचकर अपना प्रभाव दिखाना शुरू करता है, जिससे मरीज के फेफड़ों की सिकुड़न कुछ कम हो जाती है और मरीज को तत्काल राहत मिलती है। लेकिन इसके अपने साइड इफेक्ट भी हैं।

    बढ़ते प्रदूषण और घटती हरियाली की वजह से यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। सांस की इस बीमारी के कारण हर साल बहुत सारे लोग असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं और यह मौत के बड़े कारणों में से एक है। इसका कोई स्थायी इलाज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में नहीं है। लेकिन आयुर्वेद में इस रोग का इलाज संभव है। कम-से-कम उचित खानपान और आयुर्वेदिक सलाह मानकर इसपर नियंत्रण तो किया ही जा सकता है। 

    अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआइआइए) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि आयुर्वेद से अस्थमा को जड़ से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने 23,000 लोगों पर अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि आयुर्वेद से अस्थमा की बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। बशर्ते इलाज की पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाए। साथ ही खान-पान उसके अनुकूल हो।  2012 से 2017 के बीच पुणे में यह अध्ययन किया गया। इस दौरान आयुर्वेदिक पद्धति से अस्थमा के मरीजों का इलाज किया गया। अध्ययन में यह देखा गया कि अस्थमा की बीमारी ठीक हो गई। अध्ययन के मुताबिक़ बीमारी ठीक होने के बाद अस्थमा की दवाएं दोबारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इलाज के दौरान मरीजों को पंचकर्मा थेरेपी भी दी गयी। आइये जानते हैं अस्थमा को नियंत्रित करने के आयुर्वेद के नुस्खे – 

    अस्थमा को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेंद के नुस्खे

    • लहसुन – लहसुन के सेवन से अस्थमा के रोगियों को काफी फायदा होता है. हर रोज इसके सेवन से अस्थमा के रोगी को काफी फायदा होता है. खासकर शुरूआती दौर के अस्थमा के मरीजों को इसका फायदा ज्यादा मिलता है.
    • तुलसी – तुलसी भी अस्थमा रोगियों के लिए बेहद उपयोगी है। पिसी हुई काली मिर्च के साथ तुलसी के पत्ते खाने से भी अस्थमा नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा तुलसी को पानी के साथ पीसकर उसमें शहद डालकर चाटने से भी अस्थरमा में काफी राहत मिलती है।
    • केला – अस्थमा में पके हुए केले का सेवन भी फायदेमंद साबित होता है. लेकिन इसे खाने की ख़ास विधि है. पहले पके केले को छिलके सहित सेंके, फिर उसका छिलका निकालें. उसके बाद केले के टुकड़ो में पिसी काली मिर्च डालकर दमे रोगी को देनी चाहिए। इससे अस्थमा रोगी को राहत मिलेगी।
    • अजवाइन और लौंग – गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी अस्थरमा को नियंत्रि‍त करने में राहत मिलती है। यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद है। 
    • हल्दी और शहद – हल्दी और शहद मिलाकर चांटने से अस्थअमा का अटैक बार-बार नही पड़ता है. शहद की गंध को अस्थीमा रोगी को सुधांने से भी आराम मिलता है।
    • हल्दी वाली दूध – अस्थसमा का बहुत बड़ा कारण एलर्जी है. ऐसे में एलर्जी को नियंत्रि‍त करने के लिए दूध में हल्दी डालकर पीने से काफी फायदा होता है। 
    • नींबू पानी – नींबू पानी अस्थरमा के दौरे को नियंत्रि‍त करता है। खाने के साथ प्रतिदिन दमे रोगी को नींबू पानी देना चाहिए। आंवला खाना भी ऐसे में अच्छा रहता है। आंवले को शहद के साथ खाना तो और भी अच्छा है। 
    • सरसो तेल से मालिश – सरसों के तेल को गर्म कर छाती पर मालिश करने से दमे के दौरे के दौरान आराम मिलता है।